आप यह नहीं जानते कि हमलोग किस मजबूरी में फेरी करते हैं

दोस्तों आज फिर मै लेकर आया हूँ एक शानदार ब्लॉग जो आपको आज के समाज का चित्रण करेगा. आज के इस ब्लॉग में मै एक दस साल के गरीब बच्चे का चित्रण करूंगा. जिसे आप अपने आस पास के बाज़ारों में देख सकते हैं. यह बच्चा हर जगह मैजूद है. चाहे वह बड़ा शहर हो या छोटा. गाँव हो या कस्बा. हर जगह यह बच्चा मिल जाएगा. इस बच्चे का कोई नाम नहीं हैं क्योंकि यह हमसे अनजान है. हम इसको जानते नहीं है. यह बच्चा हमें अक्सर बाजारों में, मेले में या किसी त्यौहार में लगाने वाले छोटे से मेले में अवश्य मिल जाएगा.. कभी कभी तो यह बच्चा आपको छोटे छोटे स्टेशनों पर गर्मियों के दौरान भी मिल जाता है.
आप यह नहीं जानते कि हमलोग किस मजबूरी में फेरी करते हैं

दोस्तों मै आज जिस शहर की घटना का उल्लेख करने जा रहा हूँ. उस शहर का नाम है बोकारो स्टील सिटी. इस शहर के नाम से आप समझ गए होंगे कि इस शहर में स्टील बनाने की बहुत बड़ा कारखाना होगा. इस कारखाने में किसी जमाने में 70 हजार के आस पास कर्मचारी हुआ करते थे. अभी फिलहाल इस कारखाने में कुल 11 या 12 हजार के आसपास कर्मचारी काम करते हैं और लगभग 30 हजार के आस पास ठेका कर्मचारी काम करते हैं। इस शहर को तथा कारखाने को सोवियत संघ की सहायता से बनाया गया था. शहर बहुत ही खूबसूरत ढंग से बसाया गया है. बच्चों के पढ़ने के लिए सरकारी और प्राइवेट स्कूल, कर्मचारियों की चिकित्सा के लिए इस एरिया का सबसे बड़ा अस्पताल बोकारो जनरल अस्पताल , बच्चों के मनोरंजन के लिए चिड़ियाघर , सैलानियों के लिए सिटी पार्क, कई मंदिर, मस्जिद, गिरजा घर इत्यादि आकर्षण के केंद्र हैं. कर्मचारियों के रहने के लिए सेक्टरों में बटा हुआ पक्का मकान।अधिकारियों के मनोरंजन के लिए बोकारो क्लब, बाहर से आने सरकारी अतिथियों के लिए बोकारो निवास। कौन सी सुविधा नहीं है इस शहर में. हर सेक्टर में आवश्यक सामानो की खरीदारी के लिए सेक्टर मार्केट.  बोकारो स्टील सिटी की हृदयस्थली सिटी सेंटर जहाँ प्रतिदिन शाम को यहाँ के रहने वाले खरीददारी के लिए आते हैं. सिटी सेंटर में शाम को बहुत भीड़ होती है.

सिटी सेंटर में हर चीज की दुकाने, कपडे, जूते. उपहार, चश्मे, घड़ी, यहां ठेले वाले गोलगप्पे, अंडा रोल, चिकेन चिल्ली, पाव भाजी, आइसक्रीम की दुकाने बहुत सारे रेस्त्रां, विद्यार्थियों के रहने के लिए प्राइवेट हॉस्टल , शॉपिंग माल हैं. लगभग सभी सरकारी तथा गैर सरकारी बैंक। कहने का मतलब सिटी सेंटर में सुबह दस बजे से लेकर रात के ११ बजे तक चहल पहल बनी रहती है.

आज इस ब्लॉग में मैं जिस घटना का उल्लेख करने जा रहा हूँ. वह इसी सिटी सेंटर में घटित हुई है. आज रविवार का दिन था मेरी श्रीमती जी ने प्रस्ताव दिया कि आज रात में हमलोग सिटी सेंटर जाकर किसी रेस्त्रां में रात का खाना खाएंगे. मैंने श्रीमती जी की प्रस्ताव को सहर्ष स्वीकार कर लिया. सोचा बहुत दिनों से हम लोग बाहर खाना नहीं खाएं है और घर में रहते रहते थोड़ी ऊब सी भी हो गई थी इसी बहाने बाहर कभी घूम लेंगे.

ऊपर इस ब्लॉग में मैंने जिस बच्चे की बात की थी वह बच्चा मुझे यही पर सिटी सेंटर में मिला था. हुआ यों कि मैं और मेरी श्रीमती जी पैदल सिटी सेंटर में एक रेस्त्रां की और जा रहे थे तो अचानक मेरी नजर इस बच्चे पर पडी. कोई आठ साल का बच्चा होगा. हाल्फ पैंट और गंदा सा टी शर्ट पहने घूम घूम कर बैलून बेच रहा था. एक ठेले वाले के पास एक दंपती अपने दो छोटे छोटे बच्चों के साथ आइसक्रीम खरीद रहा था. सबसे छोटा बच्चा बैलून देखकर उसे लेने के लिए मचलने लगा. बैलून वाला बच्चा यह देखकर कि बच्चा बैलून लेने के लिए मचल रहा है तो वह यह सोचकर वही खड़ा हो गया कि शायद उसका बैलून बिक जाए.

बच्चे को बैलून लेने के लिए मचलते देखकर उसके पिता ने बैलून वाले से पूछा की वह बैलून कितने का देगा. बैलून वाले ने 10 रुपये में देने क़ी बात कही. बच्चे के पिता ने उससे 5 रुपये में देने के लिए कहा. पर बैलून वाले ने 5 रुपये में देने से मना कर दिया. बच्चे के पिता ने बैलून वाले को बच्चा समझकर बरगलाते हुए कहा कि बच्चा है दे दो 5 रुपये में. बैलून वाले इस पर कहा कि साहब मैं भी बच्चा ही हूँ. बड़ा थोड़े हो गया हूँ. मुझे भी भूख लगती है, मुझे भी खाने के लिए सामान खरीदना पड़ता है. अभी आप किसी  बड़े दूकान पर जाइयेगा कुछ खरीदने तो मोल भाव नहीं कीजियेगा। दुकानदार जो बोलेगा चपचाप दे दीजियेगा.  आपलोग केवल हम जैसे छोटे छोटे फेरीवालों से ही मोल भाव करते हैं. आप यह नहीं जानते कि हमलोग किस मजबूरी में फेरी करते हैं... इतना बोलकर बैलून वाला वहां से चला गया और वह व्यक्ति आश्चर्य से उसे जाते हुए देखते रह गया.  

 

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