वह अपना परिवार कैसे चलाएगा

नमस्कार दोस्तों! आज फिर से मैं एक बहुत ही दिलचस्प ब्लॉग लिखने बैठा हूँ. यह ब्लॉग आपको आज के महंगाई से अवगत कराएगा. खासकर टमाटर की महगांई से और सब्जी बेचने वाले पर उसका क्या प्रभाव पड रहा है । दोस्तों आप तो आज कल हर रोज टी वी पर समाचार पत्रों में टमाटर की महगांई की खबर देख रहे होंगे. हर जगह टमाटर की ही चर्चा हो रही है. हो भी क्यों नहीं. लगभग हर परिवार के लोग टमाटर पसंद करते हैं. कोई सलाद के रूप में खाता है तो कोई सब्जी में डालकर. सब्जी में अगर टमाटर नहीं डाला जाय तो सब्जी का स्वाद ही बिगड़ जाता है. टमाटर में बहुत सारे विटामिन पाए जाते हैं इसलिए इसे लगभग हर व्यक्ति पसंद करता है. टमाटर में विटामिन सी, पोटैशियम, बी काम्प्लेक्स और कॉलिन जैसे विटामिन पाए जाते हैं जो हमारे दिल के लिए बहुत फायदेमंद होता है. खैर जो भी हो अगर टमाटर महँगा होगा तो लोग इसे काम मात्रा में खाएंगे और उन्हें काम विटामिन मिलेगा पर एक व्यक्ति जो ठेला चलाता है और टमाटर बेचकर अपनी तथा अपने परिवार का जीविका चलाता हैं उस पर टमाटर की महंगाई का गहरा असर अवश्य पडेगा.
वह अपना परिवार कैसे चलाएगा

इस ब्लॉग में हम चर्चा करेंगे रामलाल नामक ठेले वाले की जो टमाटर बेचकर अपने तथा अपने परिवार का पालन पोषण करता है. रामलाल बिहार के सुदूर गावं में रहता था. गावं में जीविका का साधन नहीं होने के कारण अपने परिवार के साथ वह दिल्ली आया कि यहां उसे काम मिलेगा और अपने परिवार के लिए दो जून की रोटी का जुगाड़ कर सकेगा. दिल्ली में ही वह किराए का एक छोटा सा कमरा लेकर रहने लगा. कुछ दिनों तक तो दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम किया पर जितना वह काम करता था और जितनी मजदूरी मिलती थी उसमे उसका गुजारा नहीं हो पा रहा था.

कुछ दिनों के बाद रामलाल ने दिहाड़ी मजदूरी का काम छोड़ दिया और किराए पर ठेला लेकर सब्जी बेचने लगा. वह मंडी से थोक भाव में सब्जी खरीदकर गली गली सब्जी बेचने लगा. सब्जी की खरीद बिक्री से उसे इतना मुनाफ़ा हो जाता था कि उसके परिवार को दो जून की रोटी मिल जाती थी.

शुरुआत में तो उसके दिन अच्छे से गुजरने लगे. कुछ पैसो की वह बचत भी करने लगा. पर यह सिलसिला ज्यादा दिन तक नहीं चला. सब्जियों के भाव धीरे धीरे बढ़ने लगे. पहले जितनी पूंजी में वह सब्जी खरीद  कर लाता था अब वह काम पड़ने लगा. जिसका असर उसके आमदनी पर पड़ने लगा . लोग सब्जी महंगा होने के कारण  काम खरीदने लगे. धीरे धीरे उसकी पूंजी ख़त्म होने लगी। जो पैसे वह बचाकर रखा था वह भी ख़त्म हो गई. अब उसके परिवार के सामने भोजन की समस्या उत्पन्न होने लगी. नाश्ता मिलता था तो खाना नहीं और खाना मिलता था नाश्ता नहीं।
 
एक दिन वह अपनी सारी जमा पुंजी जुटाकर मंडी गया ताकि अगर कुछ सब्जी सस्ता होगा तो वह खरीदकर बेचेगा. पर यह क्या उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा. उस दिन टमाटर का भाव बहुत ज्यादा था. जितना पैसा लेकर वह आया था उतने में केवल टमाटर ही खरीद सकता है बाकी सब्जी तो वह खरीद ही नहीं सकता. वह वही बैठकर अपना माथा पकड़ लिया. सोचने लगा अब क्या करें। अगर आज उसे आमदनी नहीं होगी तो बच्चे क्या खाएंगे. आगे वह अपना परिवार कैसे चलाएगा.

जब से वह यहाँ आया है पहली बार ऐसा हुआ है की वह बिना सब्जी खरीदे घर वापस लौट आया. वह सोचने लगा की अब यह शहर बहुत महंगा हो गया है. यहां जिंदगी गुजारना बहुत ही मुश्किल होगा.  हालांकि सब्जियों के भाव अगले कुछ दिनों में धीरे धीरे काम होने लगे पर वहाँ परिस्थितियां ऐसी बनी की उसे  वापस अपने गाँव लौटना पड़ा.

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